फ से फूफा

   

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‘क्या हुआ इतनी उदास क्यों है?’ रश्मि ने रूही की उदासी भांपते हुए पूछा।
‘अरे अब क्या बताऊँ, विवान से मैंने रिश्ता तोड़ लिया।’
‘मगर क्यों?’
‘क्योंकि वो भी बाकी सब लड़कों की तरह कमिटमेंट से डरता है’ रूही ने हताश स्वर में कहा।
‘ये लड़के तो होते ही ऐसे हैं। तू परेशान न हो। सब ठीक हो जायेगा।’ रश्मि भला इस झूठे दिलासे के अलावा और कर भी क्या सकती थी?

मगर सवाल यह है कि लड़के कमिट करने से इतना डरते क्यों हैं?
चार्ल्स डार्विन की सर्वाइवल ऑफ़ दि फिटेस्ट थ्योरी का नाम तो सुना ही होगा। है न? इसमें यह बखूबी बताया गया है कि वही जीव जीवित रह पायेगा जो बाकी सबसे अच्छा होगा। अब अगर सारे अच्छे लोग आगे बढ़ते जायेंगे तो कुछ बातें तो ऐसी होंगी ही जिनको गाँठ मार लिया जाएगा और आगे के सभी वंशजों को तोहफे की तरह जन्म के समय प्रदान कर दिया जाएगा। बस यही कारण है की लड़कों को कमिटमेंट से डर लगता है।

दरअसल क्या होता है न की लड़के जब किसी लड़की से रिश्ता जोड़ते हैं तो एक बड़ी ही खतरनाक उपाधि उनके साथ जोड़ दी जाती है, जिसकी यातनाएं उन्हें पूरी ज़िन्दगी सहनी पड़ती हैं। इस उपाधि का असर एकदम आये या न आये लेकिन आता ज़रूर है। आखिर फूफा बनना आसान नहीं है। चौंक क्यों गए भई? आप चाहो तो आसपास पूछ सकते हो कि आपके किसी भी शादी- ब्याह के कार्यक्रम में सबसे अलग, थोड़े परेशान से, थोड़े गुस्से में कौन होते हैं? 71% से ज़्यादा लोग बोलेंगे हमारे फूफाजी। चीज़ ही ऐसी है फूफा।

खाया पिया कुछ नहीं कांच तोड़ा बारह आना – यही हैं फूफाओं का शादी- ब्याह में होने का सार। सबसे ज़्यादा ग़लतफहमी का शिकार कौन? फूफा। किसके पीठ पीछे सबसे ज़्यादा चुटकुले सुनाये जाते हैं? फूफा जी के। जब शादी- ब्याह में रात में छोटे बच्चे नहीं सोते तो किसकी दुहाई दी जाती है? फूफा की – सो जाओ बेटा वरना बड़े फूफा जी आ जायेंगे। फूफा न हुआ गोया गब्बर सिंह ही हो गया।

मुझे नहीं समझ आया कि इतनी दुर्गति क्यों हैं भला फूफा की। यह परेशानी आज के ज़माने की नहीं है। द्वापर युग से भी पुरानी है। मगर समझाने के औचित्य से मैं द्वापर युग में रहकर ही समझाता हूँ।

एक बार की बात है, एक बहुत ही भला इंसान रहता था पूरे राजसी ठाठ बाठ के साथ। भला इतना की वो अगर कलयुग में होता तो ट्विटर पर ट्रेंडिंग होता। नाम था धृतराष्ट्र। इस बेचारे के साथ शुरू से बहुत बुरा हुआ – जन्मांध जो था। मगर ऊपर वाले ने इनके साथ बुरा करना न छोड़ा। ये ज्यों ही कुछ अच्छा करने जाते त्यों ही कुछ न कुछ बुरा हो जाता। मगर सबसे बुरा तब हुआ जब उनकी शादी हुई एक बहुत ही काबिल औरत के साथ – गांधारी। दोनों मियां बीवी अच्छे से गुज़र बसर कर रहे थे। ऊपर वाले की मेहर थी। लेकिन इस ख़ुशी में धृतराष्ट्र भूल गए की वो अब एक फूफा भी थे। और विधि के विधान को कौन ही रोक पाया है भला। ये काल फूफाओं के लिए बड़ा ही निर्दयी रहा है।

धृतराष्ट्र तो ख़ुशी से अपना जीवन व्यतीत करना चाहते थे मगर किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था। बेचारे का पूरा घर परिवार तबाह हो गया, धरती से अस्तित्व मिट गया। मगर क्यों? मैं पूछता हूँ कि आखिर क्यों? क्या बुरा किया था उस इंसान ने? बड़े बड़े विद्वान् आपको बताएँगे की कैसे धृतराष्ट्र के बच्चों ने बहुत ही बुरा किया था। छल कपट से राज्य हड़प लिया था और न जाने क्या क्या। मगर कोई भी इंसान यह मानना नहीं चाहता की धृतराष्ट्र के साथ इतना बुरा इसलिए हुआ क्योंकि वह शकुनि की नज़रों में सिर्फ उसके बच्चों का फूफा था और कुछ नहीं।

यह दुनिया बहुत ज़ालिम है दोस्तों। यह किसी भी फूफा को नहीं बख्शती। आप अमरीकी राष्ट्रपति कैनेडी को ही ले लीजिये। कैसी बर्बरता से उनको मारा गया। कैनेडी अकेले फूफा बने अमरीकी राष्ट्रपति नहीं थे जिनका जीवन अत्यंत कठिन हुआ, उनसे पहले अब्राहम लिंकन यह दुर्गति झेल चुके थे। इतिहास गवाह है की फूफाओं के साथ अन्याय ही हुआ है।

आलम तो यह भी है साहब कि अगर सत्य नारायण भगवान की कथा के बाद मिले प्रसाद (कसार) को खाते वक़्त फूफा बोला जाए तो प्रसाद अनायास ही आपके मुख से बाहर आ जाता है। जब भगवान खुद अपने साथ फूफा को नहीं झेल सकते तो आप और मैं कौन हैं भला?

ऐसा नहीं है कि लड़कों ने इस चीज़ से बचने के लिए उपाए नहीं किये। बहुत उल्लेख हैं हमारे इतिहास में, मगर कोई उनपर प्रकाश डालने को राज़ी नहीं है। सत्यवान और सावित्री की कहानी तो आपको मालूम ही होगी। अगर पता है भी या नहीं तो भी पढ़े चलो। सत्यवान एक बहुत ही मेहनती आदमी था जिसे अपनी पत्नी सावित्री से बेहद प्रेम था। दोनों ख़ुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। सत्यवान बेचारा दुनिया के ज़ुल्मों से बेख़ौफ़ अपनी ज़िन्दगी जी रहा था। एक दिन उसने फूफाओं की दशाओं की कहानियां सुन ली अपने मित्रों से। बस फिर क्या था, बेचारा डर गया कि अनजाने में उससे यह क्या हो गया? कैसे जी पाएगा इस बोझ तले। उस बेचारे ने भगवान के आगे बहुत यातनाएं की जिससे उसे इससे छुटकारा मिल जाए।

एक दिन भगवान् से उसका यह दुःख देखा न गया (क्या पता वो खुद भी इसी दुःख से परेशान हों, मगर बतलावे कौन भला?) वह उसके स्वप्न में आये और बतलाया की भाई देख तूने कहावत तो सुनी ही होगी कि अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत। सत्यवान बोला की भगवन ई चोलबे न। कैसे भी करके इस दोष का निवारण बतलाओ महाराज, आपकी बड़ी कृपा होगी। भगवान से उसकी असहाय पीड़ा देखी न गयी और यहाँ वो पिंघल गए।

उन्होंने कहा कि अब तो बस एक ही उपाय है कि तू इस निर्मोही जीवन से बाहर आ जा और मेरे वैकुण्ठ में चल। सत्यवान एकाएक दुखी हो गया की सावित्री को एकदम छोड़कर कैसे जाऊंगा मगर अपनी सख्ती को कायम रखते हुए बोला की वो तैयार है। तथास्तु कहकर भगवान वहां से चले गए।
अगले दिन यमराज आए और सत्यवान को गले लगाते हुए कहा कि तुझसे मिलकर मेरे भाग्य सुधर गए रे सत्यवान। चल मेरे साथ और अपने कष्टों का निवारण कर ले। दोनों संग संग चल पड़े। रास्ते में यमराज अपने फूफा के किस्से सुनाते रहे और सत्यवान खुद को खुशकिस्मत समझते हुए मुस्कुराये जा रहा था कि अब तो उसे यह सब नहीं झेलना पड़ेगा। मगर इस क्षण में वह यह भूल गया की किस्मत को कोई नकार नहीं सकता।

सावित्री को जब सत्यवान का पता चला वह उसे वापस लाने दौड़ पड़ी चूंकि वो जानती थी कि एक बार जो फूफा बन जाये तो उसके दायित्वों से कोई नहीं बच सकता। सावित्री किसी भी हद तक जाकर सत्यवान को वापस लाना चाहती थी। हालाँकि सिर्फ प्रेम अकेला कारण न था उसको वापस लाने का। आख़िरकार सावित्री ने दोनों को ढूंढ लिया और सावित्री की निष्ठा के आगे यमराज पिघल गए। उन्होंने सत्यवान से माफ़ी मांगते हुए कहा, “किस्मत में पड़ जावे सूखा, जब आदमी बन जावे फूफा।” यह कहकर वो चले गए और सत्यवान एक फूफा का जीवन भोगने पर विवश हो गया।

और आपको लग रहा था कि लड़के बेवक़ूफ़ होते हैं कि वो रिश्ता निभाने से कतराते हैं। किसी कि लाड़ली बेटी से ब्याह करने की सजा अगर कोई फूफा बना कर दे तो कौन ही सही दिमाग का इंसान एकदम हाँ करेगा। इसीलिए लड़कों का ब्रैनवॉश करना पड़ता है शादी के लिए।

ब्याह के समय जब लड़के को अलग कमरे में ले जाकर समझाया जाता है, तो कोई भी बड़ा आदमी उसे रूमानी माहौल में जंग जीतने के नुस्खे नहीं देता। वो बस यही बताते हैं कि बेटा अब तो हो गया, तू अब फूफा बनने के एक कदम और करीब आ गया है। अभी सब जीजाजी जीजाजी करके तुम्हारे आगे पीछे घूमेंगे मगर तुम कब रूही वाले जीजाजी से अरुण के फूफा बन जाओगे तुम्हे पता भी नहीं चलेगा।

ये नेता लोग बड़ी बड़ी बातें करते हैं कि ये कर देंगे, वो कर देंगे, फलां सूरमा बनकर फलां पहाड़ तोड़ देंगे साहब। आजतक किसी ने भी यह मुद्दा उठाया है कि फूफाओं की दुर्गति कम करने का प्रयत्न करेंगे? ये नेताओं के बस की बात नहीं है, आपको और मुझे ही करना है। ज़्यादा करना भी नहीं है और न ही मैं कहूंगा। बस इतना करना है कि खुदको फूफा न मान कर उस घर का बेटा मान लो शायद फूफा नामक भूत उतर जाए और आप वापस से रूही वाले जीजाजी बन जाओ।

2 responses to “फ से फूफा”

  1. Shobha Avatar
    Shobha

    Hv an amazing way of writing…..”khatrnaak Upadhi” is the highest honour in this world….Jo k almost sabko milti😂

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    1. Abhishek Singh Avatar
      Abhishek Singh

      Haha. No one can escape from this!
      Thanks 🙂

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